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Pankaj Yadav 8 months ago

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Ishant Pal 8 months ago

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Atul Mishra 8 months ago

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Niraj Pathak 8 months ago

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रिश्ते की बात आज शर्मा जी अपनी बेटी के लिए रिश्ते की बात करने कोलकाता जा रहे थे. पत्नी को पुकारते हुए कहा कि कुछ ज्यादा पैसे रख लेता हूं, यदि लड़का पसंद आ गया तो लगे हाथ रोका भी करता आऊंगा. पत्नी ने कहा, पैसे तो मैं दे देती हूं पर रोका करने से पहले आपको अपने बड़े भाई से बात जरूर कर लेनी चाहिए इसके बारे में. शर्मा जी ने कहा- हाँ - हाँ क्यों नहीं? जरुर करूंगा पर अभी ये भी तो देखो कि हमें पता ही क्या है, जैसे ही थोड़ी और जानकारी मिल जाये फिर उन्हें भी बता दूंगा, और अभी मेहता ने कहा है कि लड़का भी घर आज आ रहा है छुट्टियों में, यही मौका है आकर देख-तय कर लीजिये. फ़ोन चार्ज रखियेगा, मैंने पॉवर बैंक बैग के छोटे पैकेट में रख दिया है, फुल चार्ज है, दो-तीन दिन तो चल ही जायगा, पहुँचते ही फ़ोन करियेगा पत्नी ने कहा. ठीक है, बोल शर्मा जी घर से निकल गए. स्टेशन पहुँचते ही समय सारणी पर एक नजर डाली तो पता चला शक्तिपुंज एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर ही थी, पर अभी भी 20 मिनट बाकी थे ट्रेन आने को, तो वे वहीं पास की दुकान पर चाय पीने लगे, फूंक मारी तो भाप चश्मे से जा चिपकी, चश्मा उतारा और उपरी जेब के हवाले किया फिर ऐसे खाली समय में दिमाग ने सोचना शुरू किया. शर्मा जी एक प्राइवेट कम्पनी में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे, कंपनी की हालत बहुत अच्छी नहीं तो बुरी भी नहीं थी. तनख्वाह समय और जिम्मेदारियों के वनिस्पत कम तो थी पर इनका काम चल रहा था. पुश्तैनी मकान की हालत भी बहुत अच्छी नहीं थी, पर सोच रखा था कि एक बार रिश्ता पक्का हो जाये तो मकान की रिपेयरिंग भी कम्पनी के प्रोविडेंट फण्ड से कुछ एडवांस लेकर करवा लूँगा. इधर बिटिया अपनी पढाई पूरी कर एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी कर तो रही थी पर उसका मन नौकरी में कम ही लगता था, दरअसल वह खुद के बिज़नस को शुरू करना चाहती थी, पर पूँजी के अभाव के कारण शर्मा जी ने कहा कि पहले कुछ कमा ले फिर जो करे. ट्रेन की घोषणा हुई तो उनकी तन्द्रा टूटी, चाय के कागजी गिलास को डस्टबिन के हवाले कर चाय वाले को पैसे चुका वे बढ़ चले प्लेटफार्म की ओर. तभी शर्मा जी का मोबाइल फ़ोन बज उठा, बढ़ते कदमो के साथ उन्होंने फ़ोन देखा तो मेहता जी का था, उठा कर कान से लगाया ही था कि कॉल ड्रॉप हो गया, फ़ोन जेब के हवाले कर अपने कम्पार्टमेंट की ओर बढ़ने लगे. फिर घंटी बजी तो उन्होंने सोचा कि अब सीट पर बैठ कर ही फ़ोन रिसीव करूंगा और पायदान पकड़ कर ट्रेन के अन्दर दाखिल हो गए. फ़ोन अब भी लगातार बज रहा था, जेब से फ़ोन निकल कर देखा तो किसी अपरिचित नंबर से फ़ोन आ रहा था. हैलो- कौन बोल रहे हैं? शर्मा जी ने कहा. दूसरी ओर से खडखडाती आवाज में सुनाई दिया कि मैं मेहता बोल रहा हूँ, शर्मा ! ये नंबर भी मेरा ही है नया लिया है जिओ का, क्या करू तेरी आवाज नहीं मिल रही थी, अभी आवाज आ रही है या नहीं ये बता. शर्मा जी ने कहा- “भाई अब तू चुप हो तो मैं कुछ बोलूं तो मेरी आवाज तुम्हे सुनाई दे.” मेहता जी ने कहा- हाँ-हाँ अब आने लगी, और कैसे हो ट्रेन में बैठ गए? हाँ-शर्मा जी ने कहा. भाई मेरा एक भतीजा है जिसकी ट्रेन चेंज करनी है क्योंकि टिकेट आगे कि नहीं है वह आसनसोल से तुम्हारे साथ हो जायगा ठीक है - फिर पहुँच कर बात करना और हाँ ऑटो वाले को 50 रुपये से अधिक नहीं देना मेरी कार वर्कशॉप में है, नहीं तो मैं आ जाता तुम्हे लेने, पर क्या करूँ तुम तो जानते ही हो पिता जी की आखिरी निशानी है बेच भी नहीं सकता. हाँ-भाई मैं आ जाऊंगा अभी पिछली बार ही तो गर्मी कि छुट्टियों में आया था. ओके-कहा मेहता जी ने और फिर ओके बोल शर्मा जी ने फ़ोन कट कर दिया था. पटरियों की आवाज में एकरूपता आने लगी थी जैसे ही ट्रेन ने स्टेशन छोड़ कर रफ्तार पकड़ी थी, अब कान, मानो उस शोर का अभ्यस्त हो चुका हो, सब शांत शांत सा लगने लगा था. शर्मा जी जब भी यूँ अकेले होते तो बस सोचने लगते थे. उन्हें लिखने का भी बहुत शौक था वे अक्सर ही जब मौका लगता कुछ न कुछ लिख कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहते थे. अभी कुछ उनके दिमाग में चल ही रहा था कि एक नौजवान ने उन्हें टोका- अंकल, क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ? इशारे से ही सहमती में शर्मा जी ने सर हिलाया. थैंक्स अंकल, क्या करूँ? जिस ट्रेन से आ रहा था वह काफी लेट चल रही थी, किसी तरह से इस को पकड़ पाया हूँ. अब कम से कम घर, समय पर तो पहुँच जाऊंगा, नहीं तो मुश्किल से मिली छुट्टी का एक कीमती दिन ट्रेन में ही बीत जाता. किस जॉब में हो बेटे? बस यूँ ही शर्मा जी ने पूछ लिया. जी, जिओ कंपनी में जोनल इंजीनियर नेटवर्किंग हूँ, अभी हाल ही में नोएडा सेक्टर 12 के मेन सेंटर में पोस्टिंग हुई है. वाह ये तो अच्छा है फिर तो तुम्हे काफी जानकारी होगी आज कल की टेक्नोलॉजी आदि के बारे में. हाँ-हाँ क्यों नहीं, हमें तो हर पल नयी चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहता है, और मुझे चैलेंजेज बहुत पसंद हैं, खास कर के जब आपके पास संसाधन कम हो और आप बहुत कुछ करना चाहते हों, तब आपकी काबिलियत काम आती है कि कैसे आप कम संसाधन में अधिकतम आउटपुट दे सकते हैं. मेरी कम्पनी के उच्चाधिकारी कहते हैं कि बहुत दिनों बाद उन्हें मेरे जैसे किसी के साथ काम करके अच्छा लग रहा है जो कि मेरे जैसे उम्र के व्यक्ति के लिए एक अवार्ड से कम नहीं. मैं भी दिन रात बहुत मेहनत कर रहा हूँ घर के हालात कुछ खास नहीं पिता प्राइवेट स्कूल मास्टर से रिटायर हुए हैं अभी दो साल पहले ही और मैंने अभी, 7 महीने हुए हैं मेरी नौकरी के, परफॉरमेंस देखते हुए कंपनी ने मुझे मेन सेंटर में डेप्युट किया है 6 महीने के प्रोबेसन के बाद, और पिता जी मेरी शादी कराना चाहते है, पर मेरा अभी मन नहीं हो रहा, थोडा घर के हालात ठीक हो जाये फिर देखता हूँ. बीच - बीच में दोनों ही कभी - कभी अपने मोबाइल के नोटीफिकेशन देख लिया करते थे, और एक दूसरे  से झेंप जाते कि वे एक दूसरे की बात को गंभीरता से सुन रहे हों, ऐसा व्यवहार करने लगते थे. बीच - बीच में कॉल भी आ रहे थे दोनों ही के, और एक दूसरे से बड़े अदब से अनुमति लेकर बात भी कर लिया करते थे, पर फ़ोन पर की बातें जल्द ही निपटा कर फिर एक दूसरे से बातें करने लगते. समय निकलता जा रहा था पर मंजिल अभी दूर थी, ट्रेन किसी स्टेशन पर रूकती और दोनों ही अपनी-अपनी जरूरतों के हिसाब से कुछ खरीदते और बिना साझा किए उसका उपयोग करते रहते. बात ही बात में तकनिकी बाते भी हुई हालाँकि फेसबुक व्हात्सप्प तो शर्मा जी बखूबी चला लेते थे पर नवयुवक ने शर्मा जी को उनके मोबाइल में बहुतेरी सेटिंग्स को मैनेज करना सिखा दिया, मोबाइल बैंकिंग पेय टी एम आदि या यूँ कहें कि उन्हें एक अच्छा मोबाइल यूजर बना डाला था, साथ ही साथ समसामयिक, राजनितिक और सामाजिक बिन्दुओ पर भी बहुत चर्चा हुई, शर्मा जी को लगने लगा था कि उन्हें एक सुलझे हुए नवयुवक से पाला पड़ा है जिसके कंधो में आने वाली पीढ़ी के भार को वहन करने की भरपूर क्षमता है. इसी बीच उनके एस.एम्.एस. द्वारा मोबाइल पर एक सन्देश आया जो कि उनके घर से था, “अपना इन्टरनेट चालू करिए” सन्देश उनके घर के मोबाइल से था उनकी पत्नी ने किया था. तुरंत उन्होंने भी रिप्लाई दिया कि “टावर आ जा रहा है करता हूँ थोड़ी देर में.” और फिर दोनों वापस अपनी बात में मगन हो गए. शर्मा जी ने अपनी कई कवितायें उस नवयुवक को सुना डालीं, थी और बकायदे दाद भी पाई थी. उसके दाद देने के तरीके ने तो उन्हें और भी प्रेरित कर दिया था और वे एक पर एक कविता कि झड़ी लगाये बैठे थे. वक्त गुजरता जा रहा था, शाम ढलने को थी, मंजिल करीब आती जा रही थी और उन्हें ऐसा लग रहा था कि काश ये सफ़र थोडा और लम्बा हो पाता, दोनों ऐसे मगन थे जैसे वर्षों से एक दूसरे को भली प्रकार से जानते पहचानते थे. एक बुजुर्ग ने अपने तजुर्बे दे डाले थे एक भावी पीढ़ी के कर्णधार को जो उनके नजरों में सर्वश्रेष्ठ और सुपात्र था. तभी नवयुवक के फोन पर व्हात्सप्प आया कि वो उसे भेजे गए नंबर पर अपनी कुछ तस्वीरें भेज दे. पिताजी का आदेश था न चाहते हुए भी उसने अपनी कुछ तस्वीरें निकली और भेज दीं. पर वह तस्वीरें रिसीव नहीं हो पायीं क्योंकि पाने वाले का इन्टरनेट कनेक्शन बंद था. उसने जवाब में ओके लिखा और बता दिया कि उसने आदेश का पालन कर दिया है और फ़िलहाल सफ़र में है अभी फ़ोन कर उसे कोई डिस्टर्ब न करे. जवाब में उसे तुरंत ओके प्राप्त भी हो गया और वह संतुष्ट भाव से पुनः शर्मा जी के साथ उनके कविताओं पर दाद देने लग गया था. अब शर्मा जी की बारी थी, उन्होंने जैसे ही अपनी कविता की दो चार पंक्तिया पढ़ी ही थीं कि पुनः उनके मोबाइल पर एस.एम्.एस. आया कि वे अपना इन्टरनेट चालू करें कोई व्हात्सप्प पर उन्हें लड़के की तस्वीर भेजने वाला है. अब उनकी उत्सुकता देखने लायक थी. इसी बीच उनकी व्यस्तता को देख नवयुवक ने उनसे कहा कि “अंकल आप घर पर बात कर ही लो, मैं देख रहा हूँ आप बहुत देर से अभ्वाईड कर रहे हैं. मैं भी थोडा टॉयलेट से हो आता हूँ, कृपया मेरे ट्राली बैग की रक्षा करेंगे. मैं अभी आया.” ट्रेन की रफ़्तार से स्वतः सशरीर हिलते शर्मा जी ने सहमती में अपनी गर्दन हिला दी, नवयुवक भी चलती ट्रेन में सँभलते कदमो से टॉयलेट कि ओर बढ़ चला. उन्होंने जैसे ही अपने मोबाइल का इन्टरनेट डाटा कनेक्शन चालू किया माना संदेशों की बरसात होने लगी थी उनके मोबाइल पर, सबको उन्होंने अनसीन ही सामने से हटा दिया. तभी उनके मोबाइल पर घर से फ़ोन आया, टावर फुल आ रहा था तो उन्होंने भी फ़ोन झट रिसीव कर लिया. फ़ोन पत्नी ने किया था कहने लगी- ओह! आप भी कमाल करते हैं, कितनी बार कहा है कि फ़ोन एंड्राइड है बिना इन्टरनेट के डब्बा है बस, पूरा पॉवर बैंक फुल चार्ज कर के दिया है फिर भी न आप अपना इन्टरनेट बंद रखते हैं. शर्मा जी ने हलकी झुझलाहट भरे स्वर से कहा कि अरी भागवान फ़ोन जिस कारण किया है वो तो कहो, बस अब मैं पहुँचने ही वाला हूँ. अगला स्टेशन आने ही वाला है जहाँ उतरना है. फिर उनकी धर्मपत्नी ने सारा वृतांत कह डाला कि मेहता जी ने आपको बहुत ट्राय किया पर लाइन नहीं मिल रही थी. उन्होंने कहा कि आपका नंबर उन्होंने लड़के वालों को दे दिया है, उसपर लड़के की तस्वीर व्हात्सप्प से आने वाली है, यदि आ गयी हो तो मुझे भी भेज दीजिये घर पर बुआ जी आई हैं उन्हें भी देखनी है. इस बात पर शर्मा जी अस्वस्त होकर बोले कि हाँ-हाँ बहुत मेसेज आये हैं पर इससे पहले कि देख पता तुम्हारा फ़ोन आ गया, देख कर भेजता हूँ. ठीक है… कहा ही था कि फोन कट गया देखा तो टावर जा चुका था. शर्मा जी ने व्हात्सप्प चेक किया तो पाया कि एक अपरिचित नंबर से कुछ आया तो है पर टावर चले जाने की वजह से वह डाउनलोड नहीं हो पाया था. तभी नवयुवक लौट आया था टॉयलेट से, एक नजर अपने ट्राली बैग पर डालते हुए उसने कहा कि क्यों अंकल कर ली आपने बात घर पर? शर्मा जी की गर्दन फिर वही सहमती में एक बार फिर आंदोलित हो उठी थी, पर फिर नकारते हुए उन्होंने कहा कि बात पूरी नहीं हो पाई और टावर चले जाने से बात बीच में ही अधूरी रह गयी. इस पर नवयुवक ने कहा- “हाँ, अभी आउटर सिग्नल क्रॉस हो रहा है न इसलिए यहाँ थोडा डाउन एरिया है यहाँ अक्सर टावर कम हो ही जाता है.” बस हमारा गंतव्य स्टेशन आने को ही है, वहां आपकी बात पूरी तरह से हो जायगी, स्टेशन एरिया होने से टावर अच्छा रहता है. आखिरकार ट्रेन गंतव्य स्टेशन पर रुकी और दोनों उतरे, शर्मा जी से प्रभावित नवयुवक ने जाते-जाते उनके पैर छुए तो शर्मा जी ने उसे गले से लगा लिया और कहा- बेटे जैसी बाते तुमने अभी ट्रेन में बातचीत के दौरान की हैं, जीवन भर वैसे ही आचरण करना और इसके लिए ईश्वर तुम्हे संबल दें, मेरी ओर से यही आशीर्वाद है. नवयुवक ने हामी भरी और ओके अंकल बाय कहकर स्टेशन से बाहर की ओर जाने वाले ओवर ब्रिज की ओर बढ़ चला. अनायास ही शर्मा जी भी बाय बेटे बोल बैठे थे, स्टेशन से बाहर जाना तो वो भी साथ ही चाहते थे उसके पर तभी उनका फ़ोन बज गया था और वे बाय बोल फ़ोन में व्यस्त हो गए. हाँ बोल भाई मेहता क्या हाल चाल हैं. मैं तो स्टेशन पर आ गया हूँ और बाहर निकल रहा हूँ. ठीक है मैं तेरा घर पर ही इन्तेजार कर रहा हूँ. अभी अभी फ़ोन आया था उनका लड़का भी शहर में आ चुका है, तू घर आ जा थोडा फ्रेश हो जा फिर चलते हैं उनके घर. शर्मा जी ने ठीक है कहा और फ़ोन काट दिया था. उन्हें जल्दी पड़ी थी लड़के की तस्वीर घर वाले नंबर पर भेजने की क्योंकि इसी बीच घर से तीन मिस्ड कॉल हो चुके थे. इन्टरनेट अपने पूरे सबाब पर था क्लीक करते ही फोटो डाउनलोड हो गया था, एक टक वे तस्वीर को देखते जा रहे थे और बस देखते ही जा रहे थे क्योकि बीती रात भर सफ़र के दौरान जो नवयुवक उनके साथ था तस्वीर उसी की थी, अचरज और हर्ष दोनों के मिश्रित भाव उनके चेहरे पर एक साथ उभर रहे थे और एक दिव्य-प्रसन्नता से भरी मुस्कान उनके होठों पर मचली ही थी कि तभी घर से फिर फोन आ गया, उन्होंने झट से फोन रिसीव किया और कहा मैं भेज रहा हूँ, अभी अभी टावर आया है मैं स्टेशन पर हूँ. इस बात पर पत्नी ने कहा अभी अभी टावर आया है तो इतनी देर से कहाँ बातें कर रहे थे? वो मेहता था उससे बाते हो रही थी. मैं तुम्हे ही तस्वीरे भेज रहा था अब बस तुम फोन रखो मैं भेज रहा हूँ. कहकर फोन काट दिया. शर्मा जी ईश्वर को मन ही मन धन्यवाद कह रहे थे, क्योंकि उन्होंने उनका काम आसान जो कर दिया था. लड़के की तस्वीर घर भेज वो स्टेशन से बाहर की ओर जाने वाले ओवर ब्रिज की ओर बढ़ने लगे. मेहता के यहाँ पहुँचते ही शानदार आवभगत हुई, मानो मेहता तो पलक पावडे बिछाए शर्मा जी का इन्तेजार ही कर रहा था, करता भी क्यों नहीं मेहता को जब-जब शर्मा जी की जरुरत पड़ी थी आगे आकर शर्मा जी ने उसकी मदद करी थी, दरअसल दोनों पहले एक साथ ही काम किया करते थे, बाद में कहासुनी होने से मेहता ने जॉब छोड़ दी थी और यहाँ कोलकाता आकर काम करने लगा था. क्यों भाई? क्या सोचने लगा तू सब खैरियत? मेहता ने उन्हें चुपचाप कुछ सोच में पड़े देख अनायास ही पूछ लिया था. शर्मा जी ने कुछ नहीं में गर्दन हिलायी और कहा “कितनी देर में चलेंगे वहां क्योंकि कुछ काम है तो सोचता हूँ कि आज ही लौट जाऊं.” अरे बस तू तैयार है ही चाय ख़तम कर के अभी के अभी चलते हैं. तभी मेहता के कोई फ़ोन आया और वो बोल पड़ा भाई वह इसे कहते है गुरु के चरण, चलिए पहले वर्कशॉप जायेंगे गाड़ी रेडी हो चुकी है अभी वर्कशॉप से ही फ़ोन आया था अब हमें टैक्सी बुक नहीं करनी पड़ेगी. दोनों लड़के वाले के घर पहुंचे वहां भी खूब आवभगत हुई परम्परागत तरीके से बात चीत हुई मांग की बात पर लड़के के पिता ने कहा देखिये आप लड़की के पिता हैं हम भी हैं, हमारी भी एक लड़की है हम नहीं चाहते कल को हमारी बेटी भी ऐसी वैसी जगह ब्याह दी जाये, पर हमारे बेटे के कहे अनुसार हम कोई दहेज़ नहीं लेंगे हाँ आपको जो देना हो आप अपनी ओर से जो कर सकें उसके लिए आप स्वतंत्र हैं. बस भावी जोड़ी एक दूसरे को पसंद कर ले तो ठीक रहेगा. शर्मा जी ने कहा, जी आपके विचार सुनकर मन को तसल्ली हुई है. भावी जोड़ी के मन को जाने बगैर इस तरह के जीवन भर के रिश्ते की नीव रखना बेमानी होगा. मेहता जी ने इशारे से कहा कि अब लड़के को बुला लीजिए तो इसपर लड़के के फूफा ने कहा कि वे अभी अभी सफ़र से आया है तो सोया हुआ है आप लोग खाने पर मिल लीजिएगा, और अगर ऐसा है तो हम उसे अभी भी उठा सकते हैं. फुसफुसाते देख शर्मा जी ने कहा कि “रहने दीजिये न, आराम करने दीजिये मैं भी तो रात भर जगा ही हूँ और अभी मुझे रुकना भी है तो कल आकर मिल लेंगे कोई बात नहीं अब इजाजत दिजिये आप सब से मिलकर बहुत अच्छा लगा. सचमुच इस घर में बेटी देकर मैं अपने को धन्य मानूंगा. मेहता, शर्मा जी की बातों को आश्चर्य से सुन रहा था, बाहर आते ही उसने पूछा क्यों जी तुमने तो कहा कि आज ही निकल रहे हो फिर यहाँ आकर क्यों कह रहे हो कि रुक रहे हो? शर्मा जी ने कहा क्यों तुम्हे मेरे रुकने से कोई परेशानी हो रही है? नहीं मगर तुम्हारी बात समझ में नहीं आई. आओ तुम्हे समझाता हूँ कहकर दोनों गाड़ी में बैठ वापस चल दिए. रास्ते में शर्मा जी ने मेहता को सारी बाते बता दीं. और कहा कि वह उसे स्टेशन ही छोड़ दे रात तक घर पहुँच जाऊंगा, कम से कम एक दिन कि छुट्टी तो बचेगी. मेहता ने शर्मा जी को स्टेशन छोड़ा और शर्मा जी दोपहर की शक्तिपुंज एक्सप्रेस पकड़ के घर लौटने लगे. इसी बीच ट्रेन में बैठे-बैठे मोबाइल से उन्होंने पेय टी एम् के जरिये 5001 रुपये लड़के को ट्रान्सफर करके भेजा और सन्देश में लिखा “बेटे इसे शगुन समझ कर रख लेना” इधर घर पर उन्होंने लड़के का नंबर भी भेज दिया और कहा कि वो बेटी के फोटो उस नंबर पर भेज दे, ताकि वे लोग भी लड़की को देख सकें क्योंकि वे लड़के से मिल नहीं पाए पर उनके परिवार वालों को उन्होंने लड़की का फोटो और बायोडाटा दिखा दिया था जो कि उन सबको बहुत पसंद भी आया था और वे भी भावी जोड़ी को एक दूसरे के मन पर आने के लिए कुछ समय देना चाहते थे. उधर लड़के के मोबाइल पर जैसे ही पेय टी एम् का सन्देश रिसीव हुआ तो उसकी नींद टूटी और उसने चेक किया तो पाया कि जहाँ एक ओर जिस नंबर से पैसे आये थे वहीं दूसरी ओर व्हात्सप्प सन्देश भी उसी नंबर से आया था जिसपर उसने अपनि तस्वीरे भेजी थी, शर्मा जी को मोबाइल के विभिन्न सेटिंग्स सिखाते वक्त उसका ध्यान इस ओर नहीं जा सका था, पर अब वह समझ गया था कि जिस व्यक्ति से वह मिला था वह उसके कौन होने वाले थे, पर व्हात्सप्प डी पी में शर्मा जी ने फूल लगा रखे थे इसलिए थोडा कन्फ्यूजन बाकी था दूर होने को. तभी उसके मोबाइल पर किसी अन्य नंबर से लड़की का फोटो आया और वह उसे लेकर अपनी माँ के पास गया, पर तभी उसकी बहन ने उससे मोबाइल लेते हुए कहा कि पहले मैं देखूंगी. और उसने देखा और एक मेसेज भेज दिया “सुन्दर” इस पर लड़के ने कहा कि ये क्या मैंने तो अभी ठीक से देखा भी नहीं, इस पर माँ ने कहा कोई बात नहीं सुन्दर कह देने से रिश्ता पक्का थोड़े ही हो जाता है, ला मुझे देखने दे, हाँ है तो ठीक ठाक ही, पर तुझे चले तो ही बता कोई जबरदस्ती नहीं है. लड़के ने मोबाइल लिया और मेसेज टाइप किया कि, आप अपने पापा की तस्वीर भेजिए. लड़की सन्न, ये क्या पापा की क्यों? बस आप भेजिए तो सही. लड़की ने भेज दी. माँ और बहन दोनों लड़के की इस हरकत को बड़े गौर से देख रहे थे. तभी मोबाइल पर लड़की के पापा की तस्वीर आ गयी, लड़के ने मेसेज लिखा आप पापा को यही फोटो व्हात्सप्प डीपी लगाने को कहिये. इसमें पापा बहुत सुन्दर लग रहे हैं. आपको पापा से शादी करनी है कि मुझसे? लड़के ने कहा “ये आपके पापा हैं इसलिए मुझे आपसे शादी करनी है.” इस पर लड़की ने कोई उत्तर नहीं दिया. जब शर्मा जी घर पहुंचे तो पत्नी को सारी बात बताई फिर क्या था लग्न पत्रिका लिखाई जाने को पंडित जी को बुलावा भेज दिया गया, क्योंकि जब अनजान बनकर किसी से मिलते हैं तो सहज ही अपनी भावनाओं को व्यक्त कर पाते हैं, औपचारिकता में तो सब असहज भाव छिप जाते हैं और वास्तविकता का भान तक नहीं हो पाता जिससे दोनों ही पक्ष अनजान ही रह जाते है. तभी मेहता का फ़ोन उनकी धर्मपत्नी की मोबाइल पर आया, जिसे सामने रखा देख शर्मा जी ने ही उठा लिया, इससे पहले कि शर्मा जी कुछ कहते मेहता ने बोलना शुरू किया, क्यों भाभी कैसी रही अपनी सेटिंग एक बार में उसे जैसा चाहिए था ढूंढ कर दिया कि नहीं, मैं जानता हूँ उसे अगर वो आम तरीके से लड़के के घर जाता उससे मिलता तो उसे कभी भी संतुष्टि नहीं मिलती, इसलिए मैंने ये सारा खेल रचा न लड़के को ख़बर हुई और न इसे, मैंने ही दोनों के टिकट कराये थे एक ही ट्रेन के और मेरे एक टी.टी. मित्र ने मेरी मदद की और लड़के को बीच रास्ते में उस ट्रेन में वही जगह दिला दी जहा हमारे प्यारे शर्मा जी बैठे थे. अच्छा तो ये सारी चाल तुम्हारी थी मेहता के बच्चे तू मिल.... दोनों मित्र हंसने लगे थे.
Ankit Sharma 8 months ago

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Niraj Pathak 8 months ago

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Short Story गोबर हमारे मोहल्ले के नवनिर्वाचित वार्ड पार्षद रोज सुबह अपने घर से निकलते और पाते की सड़क पर पूरी सफाई दिख रही है, कुछ इक्का दुक्का प्लास्टिक के रैपर या कागज के टुकड़ों के अतिरिक्त उन्हें कुछ खास गन्दगी नजर नहीं आती थी. वे मन ही मन बहुत प्रसन्न हुआ करते और अपने सफाई कर्मियों की तारीफ भी मौके बेमौके अपनी जनता के बीच कर दिया करते. पार्षद बनते ही उन्होंने अपने में कुछ बदलाव भी लाया और जो पहले कभी यदा कदा कहीं गलती से कुछ फेंक दिया करते थे, अब ऐसा करना बिलकुल बंद कर दिया था. वे सदैव ही अपने परिवार के सदस्यों से आग्रह कर दिया करते कि अब उनको अथवा उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा ऐसा किया जाना कतई जायज नहीं, आखिर उन्हें एक आदर्श जो स्थापित करना था. वे हमेशा चिंतन मनन करते रहते कि कैसे लोगों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता फैलाई जाये, और तो और तब उनका मन और दुखी हो जाता जब वे चाय की दुकान पर बैठे भैया जी, जो एक मात्र उनकी बातों के बहुत ही ध्यान से सुनते और सहमत होते थे, चाय पीने के बाद प्लास्टिक के कप को बड़ी बेध्यानी से रोड पर ही फेंक देते और पार्षद जी भी झेंपते हुए दुकानदार को सलाह देने लगते कि भाई प्लास्टिक का कप क्यों रखते हो? तब दुकानदार अपनी आर्थिक स्थिति का आंकलन करके बताता कि सर ये सस्ता पड़ता हैं ना, आज कल मिट्टी के भांड से भी सस्ता ये प्लास्टिक के कप हैं, कागज वाला मिट्टी वाले से थोड़ा ही सस्ता है मगर प्लास्टिक का कोई मुकाबला नहीं. फिर हमारे पार्षद जी मन मसोस कर रह जाते. कई मौकों पर जब उन्हें बुलाया जाता किसी उद्घाटन या संबोधन आदि के लिए तो वे वहां भी स्वच्छता और प्लास्टिक आदि के विरोध में भाषण झाड़ बैठते और आयोजकों से कहते कि अगली बार वे जब उन्हें बुलाएँ तो वे वचन दें कि प्लास्टिक के कप या ग्लास का प्रयोग नहीं करेंगे. फिर क्या आज तक वे दुबारा किसी संबोधन के लिए एक जगह पर नहीं जा पाए. वास्तव में पार्षद जी हमेशा मन कि स्वच्छता को लेकर चिंतित रहने लगे थे. क्योंकि असली गन्दगी तो हमारे मन में भरी थी. लोगों की स्वच्छता सम्बन्धी शिकायतों का अम्बार रोज उन्हें सफाई कर्मियों को निर्देश देकर निपटाना पड़ रहा था. वे अपनी पूरी कोशिश में लगे थे. एक दिन उन्हें उनकी श्रीमती जी ने बताया कि पड़ोस के सेवा निवृत शिक्षक महोदय रोज सुबह अपने घर के सामने की गली में स्वयं ही झाड़ू लगा लिया करते हैं, फिर क्या था पार्षद जी जा पहुंचे मास्टर साहब के घर और हाथ जोड़ कर निवेदन किया कि वे ऐसा न किया करें सफाई कर्मी कर दिया करेंगे. मास्टर जी ने कहा कि उन्हें ऐसा करना न सिर्फ अच्छा लगता है बल्कि ये उन्हें जरूर करना चाहिए क्योंकि स्वच्छता सिर्फ पार्षद की जिम्मेदारी नहीं हम नागरिकों की भी जिम्मेदारी है और बिना जन सहयोग के इसे प्राप्त नही किया जा सकता. फिर भी बड़े आग्रह के बाद आज के दिन उन्होंने पार्षद जी का आग्रह मान लिय था और पार्षद जी ने सफाई कर्मी को मोबाइल फोन से आदेश दे डाला कि आज इस गली को साफ कर दिया जाय. पार्षद जी की बात अभी पूरी भी नहीं होने पाई थी कि एक खुली गाय ने आकर गोबर कर दिया वही मास्टर जी के घर के सामने ही. चूंकि पार्षद जी ने सफाईकर्मी को आदेश दे दिया था तो वे मास्टर जी को आश्वस्त करते हुए आगे बढ़ गए और लगभग मोहल्ले से कुछ ही दूर गए होंगे कि घर से श्रीमती जी का फोन आया कि आज बस नहीं आयेगी और उन्हें बच्चों को स्कूल छोड़ने जाना होगा, फिर क्या पार्षद जी उलटे पांव घर की और लौट चले. जैसे ही वे मास्टर जी के घर के सामने से गुजरे तो उन्होंने देखा कि जो गोबर थोड़ी देर पहले उनके दरवाजे पर था उससे पानी के साथ मिश्रित करके सामने के हिस्से को लीपा जा चूका था और मास्टर जी हाथ में झाड़ू लिए घर के अन्दर प्रविष्ट हो रहे थे. समस्या का समाधान उसी में ढूँढा जा चूका था. पार्षद जी सोचते सोचते घर की और बढ रहे थे कि काश ऐसे लोग आज हमारे समाज में हों कि जो हमारे आस पास को अपना घर समझें और जैसे अपने घर के अन्दर सफाई रखते हैं वैसे ही घर के बाहर भी स्वच्छता में अपना सहयोग दें न कि अपना कचरा दूसरे के घर के बाहर डाल दें और कोई और डाले तो उसे रोकें और उसकी शिकायत करें. सचमुच मास्टर जी जैसे विचार वालों की बहुत आवश्यकता है. आखिर यह कैसी विडंबना है कि हम आत्मशुद्धि के नाम पर शरीर चमकाते हैं और स्वच्छता के नाम पर अपना घर जबकि मन अन्दर से और घर बाहर से मैला ही रह जाता है. पार्षद जी ने मन ही मन ठान लिया कि वे आने वाले गणतंत्र दिवस पर मास्टर जी को सम्मानित करेंगे स्वच्छता में अपना योगदान देने के लिए. नीरज कुमार पाठक वार्ड पार्षद वार्ड - २३ नगर परिषद् फुसरो
Niraj Pathak 8 months ago

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KULDIP SONI 8 months ago

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Suraj Pant 8 months ago

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???
Abhishek Panthi 8 months ago

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